उत्तर प्रदेश के जनपद कासगंज के परिवहन डिपो के कुछ कर्मचारियों का घिनौना अपराध सामने आया है। जहां राजस्व का बड़ा घोटाला लम्बे समय से करते चले आ रहे हैं। इस काले कारनामे की पोल तब खुली जब कासगंज से दिल्ली जाने वाली बस संख्या यू पी 78 जे एन 8748 पर तैनात मनोज कुमार ने यात्रियों के हाथ में बिना प्रिंट की हुई फर्जी टिकिट थमा दी।
फिर क्या था इतना देख यात्रियों का पारा हाई हो गया और हंगामा काट दिया । परिचालक मनोज के सामने यात्रियों ने एक सवाल खड़ा कर दिया कि हम पूरा पैसा दे रहे हैं फिर हमें फर्जी टिकिट क्यों दे रहे हो। लेकिन परिचालक के पास इसका कोई जबाब ना मिला। जबाब मिला तो बस ये कि यहीं टिकिट है लेना है तो लो वरना गाड़ी से उतर जाओ तुम्हें जहां पहुंचना है वहां पहुंचा देंगे टिकिट से क्या लेना देना। यात्रियों ने बस को वहीं रुकवा लिया और परिचालक की इस करतूत को लेकर हंगामा काटा।
इतने में वहां से गुजर रहे मीडिया कर्मी इस हंगामे को देख वहां रुके और सबकी बातों को जाना और यात्रियों की पीड़ा को भी सुना। परिचालक से भी सवाल किया तो परिचालक ने भी कबूला कि हाँ में कुछ सवारियों का घोटाला कर देता हूँ। वहीं एक यात्री ने मीडिया कर्मी को बताया कि मैं सालों से आये दिन इस बस में सफर करता आ रहा हूँ, मैं भी ये कारनामा देख रहा हूँ ये तो बहुत लंबे समय से चल रहा है। शिकायत करते तो किससे करते बस में किसी अधिकारी के नम्बर ही नहीं लिखे , जब इसकी भी जानकारी की गई तो पता चला कि नम्बर जानबूझकर गायब कर दिए हैं ताकि कोई इस करतूत की खबर अधिकारी तक ना पहुंचा दे।
कुछ यात्री मीडिया कर्मियों को बस में ले गए और इधर उधर देखा तो आपातकालीन द्वार के सामने पड़ी अतिरिक्त सीटों सहित पूरी बस में लगभग 8-10 सीटें अतिरिक्त देखी गई। अब सोचने वाली बात है कि अगर रोज के हिसाब से अगर हजारों की चोरी हो तो साल में लाखों का चूना राजस्व को लगाया जा रहा है। जब मीडिया कर्मी इस काले कारनामे का सच जानने के लिए कासगंज ARM ओमप्रकाश के पास पहुंचे और इस बारे में सवाल किये तो अनभिज्ञता दिखाते हुए कहा कि मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता अगर ऐसा है तो जांच कर कार्यवाही करेंगे।
सबसे बड़ा सबाल तो यह है कि जब सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है तो इतने समय से ARM साहब कहाँ थे , इनकी जिम्मेदारी क्या थी? कितने बार ARM साहब ने इस गाड़ी को चैक किया है। एक सवाल और लोगों के मन में है और वो पूछना चाहते हैं कि इतना बड़ा घोटाला बिना किसी की मिलीभगत से कैसे सम्भव है। इसके खुलासे के लिए टीमें गठित होना जरूरी है ताकि इस चोरी के कारनामे का पर्दाफाश हो सके।
सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला है कि इस राजस्व की चोरी करने बालों का तार बहुत लंबा जुड़ा हुआ है। और इस कारनामे पर हमदर्द बनकर पर्दा डालने का प्रयास भी कर रहे हैं । यह चोरी राजस्व को एक बहुत बड़ी चुनौती है, इस घोटाले की जांच के लिए खुफिया जांच टीमें गठित करने की शख्त आवश्यकता है ताकि जल्द राजस्व चोरी माफियाओं की पोल खुलकर इसका पर्दाफास हो सके।






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